लालू की जमानत पर कुछ देर में होगी सुनवाई, बेल पर टिका सियासी खेल

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रांची। चारा घोटाला मामले में सजायाफ्ता लालू प्रसाद की जमानत याचिका पर शुक्रवार को हाई कोर्ट में सुनवाई होगी। लालू प्रसाद की ओर से वरिष्ठ वकील और कांग्रेस के बड़े नेता कपिल सिब्बल बहस कर सकते हैं। पिछली सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ही लालू का पक्ष रखने के लिए झारखंड हाई कोर्ट पहुंचे थे।

लालू प्रसाद यादव को देवघर, चाईबासा व दुमका कोषागार से अवैध। निकासी मामले में सीबीआई की अदालत ने सजा सुनाई है। सजा के खिलाफ लालू प्रसाद ने हाई कोर्ट में अपील याचिका दाखिल की है। याचिका में बढ़ती उम्र और कई बीमारियों का हवाला देकर जमानत की गुहार लगाई गई है।

लालू प्रसाद को पिछले साल 23 दिसंबर को ही सजा हुई थी। राजद व लालू परिवार की ओर से तीन आधार पर जमानत मांगी गई है। पहला आधार जदयू के पूर्व सांसद जगदीश शर्मा का है, जिन्हें पिछले महीने जमानत मिल चुकी है। जगदीश को भी उन्हीं मामलों में पिछले साल सजा हुई थी, जिनमें लालू को हुई थी। जमानत मांगने का दूसरा आधार मेडिकल है। याचिका में कहा गया है कि सालभर से ज्यादा समय से जेल में रहने के कारण उनकी सेहत लगातार गिर रही है।

इसी आधार पर पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. जगन्नाथ मिश्र को भी जमानत मिल चुकी है। तीसरा आधार चुनावी वर्ष है। लालू अपने दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। उन्हें रणनीति बनानी है। प्रत्याशी तय करने हैं और सिंबल बांटने हैं। इसलिए जेल से बाहर आना जरूरी है। तर्क है कि सुप्रीम कोर्ट के नियमन के मुताबिक सजायाफ्ता कैदी पर सिर्फ चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध है। पार्टी के अन्य काम के संबंध में कोई निर्णय नहीं आया है।

बेल पर टिका बिहार का सियासी खेल

लालू को जमानत मिलती है या नहीं, इस पर देश-प्रदेश की निगाहें टिकी हुई हैं। महागठबंधन के घटक दलों की बेकरारी बढ़ गई है। लालू की सियासी हैसियत और जमीनी पकड़ को देखते हुए भाजपा-जदयू की टकटकी भी लगी है। उनकी चुनावी रणनीति लालू के अंदर-बाहर रहने के हिसाब से ही तय होगी।

राजद को जमानत मिलने की उम्मीद

लालू की जमानत याचिका पर वरिष्ठ कांग्र्रेसी नेता और वकील कपिल सिब्बल बहस करेंगे। राजद को उम्मीद है कि इस बार जमानत मिल जाएगी। राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी के मुताबिक, सीबीआइ ने अड़ंगा नहीं लगाया तो लालू बाहर आ जाएंगे।

राबड़ी बन सकती हैं विकल्प

लालू को जमानत नहीं मिलने के बाद के विकल्प पर भी विचार कर लिया गया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष की हैसियत से चुनाव आयोग में प्रत्याशियों को सिंबल देने के लिए लालू ही पंजीकृत हैं। जमानत नहीं मिलने की स्थिति में इसके लिए राबड़ी देवी को अधिकृत किया जा सकता है। वह अभी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं। प्रत्याशी चयन का मोर्चा तेजस्वी यादव संभाल सकते हैं। शिवानंद का मानना है कि लालू के बाहर रहने से कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ सकता है, लेकिन तेजस्वी भी अब परिपक्व हो चुके हैं। इसलिए राजद के वोटरों पर कोई खास असर नहीं पड़ने वाला।

Courtesy….NaiDunia