राजकोट में ना फैले चमकी बुखार इसलिए हो रही है विशेष तैयारी, नष्ट की 142 किलोग्राम लीची

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अहमदाबाद। बिहार राज्य के मुजफ्फरपुर में चमकी बुखार के चलते 150 से अधिक बच्चों की मौत की घटना का गुजरात ने भी संज्ञान लिया है। इसके मद्देनजर राजकोट महानगर पालिका ने सावधानी के कदम उठाए हैं। मनपा ने शहर के आठ स्थलों पर निरीक्षण कर निम्न स्तर की 142 किलोग्राम लीची को नष्ट किया है।

बता दें कि, मुजफ्फरपुर में बच्चों में एनकेफेलाइटिस सिंड्रोम अर्थात मस्तिष्क ज्वर फैला हुआ है। इससे बच्चों की लगातार मौत हो रही है। इसे ध्यान में रखते हुए राजकोट महानगर पालिका ने शहर में साफ-सफाई अभियान शुरू किया है। मनपा ने कयास लगाया है कि अस्वास्थ्यप्रद लीची फल के सेवन से यह बीमारी फैली है। इसे देखते हुए मनपा ने शहर के अमीन मार्ग से 78 किलो अखाध लीची नष्ट कर दी है। इसके अतिरिक्त गुंदावाड़ी रोड से 29 किलो, ज्युबिली बाग पराबाजार से 18 किलो एवं टैगोर रोड, याज्ञिक रोड, जगन्नाथ प्लाट, मवडी रोड, मैंगो मार्केट सहित कुल 142 किलो अखाध लीची नष्ट कर दी गई है।

जानकारी के अनुसार लीची फल मई से जुलाई के दौरान उत्तरभारत के राज्यों में पैदा होती है। यह जल्द ही खराब हो जाने वाला फल है। इसलिए राजकोट महानगरपालिका ने लोगों को आगाह किया है कि वे एक इंच से छोटे और हरे तथा सख्त लीची का उपयोग न करें। वे भूखे पेट लीची का सेवन न करें। नरम तथा गली हुई लीची न खरीदें।

कहा गया है कि बिहार में खाली पेट लीची का सेवन करने के कारण इस बीमारी ने अपना शिकंजा कस दिया है। यह बीमारी 15 वर्ष से कम आयु के बच्चों में फैल जाती है। इस बीमारी से ग्रस्त बच्चों के व्यवहार में परिवर्तन आ जाता है। बुखार के साथ उनकी मनोदशा बदल जाती है। वे हिचकी और खैंच के शिकार हो जाते है। उनके मस्तिष्क में सूजन के साथ ही कोई अंग में पैरालिसिस भी हो जाता है। इस बीमारी से ग्रस्त बच्चों को यदि समय से चिकित्सा न मिले तो उनकी मौत हो जाती है। उनके बचने पर वे काफी समय तक न्यूरोलोजिकल कमजोरी महसूस करते है। कहा गया है कि लीची में हाय पोग्लायसेमिया नामक तत्व के कारण यह बीमारी फैलती है।

Courtesy: NaiDunia