Batla House Trailer Review : बिरयानी के शौकीन हैं तो पसंद नहीं आएगी ये चायनीज भेल

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रैप सॉन्ग सुना है कभी आपने, बंदा इतनी तेजी से बात कहता है कि कोई पके कान वाला ही इसे एक बार में समझ सकता है। ‘बाटला हाउस’ के ट्रेलर भी कुछ ऐसा ही है। निखिल आडवाणी काफी बेसब्र थे अपनी इस फिल्म की तमाम बातें बताने के लिए। 2.55 मिनट में उन्होंने इतना कुछ डाल दिया है कि एक बार में समझना मुश्किल है।

पूरे वक्त किसी ना किसी आवाज बैकग्राउंड में गूंजती रहती है। क्या बातें हो रही हैं, कान उस पर लगाइए.. इस बीच आंखें वो सीन देख रही हैं जिसका बातों से कोई लेना-देना नहीं है। दो-तीन बार इस वीडियो को आप देखेंगे तो शायद कुछ समझ आए… कुछ से ज्यादा समझ जाते हैं तो अपनी पीठ जरूर थपथपाइएगा। और एक बात… ‘साहो’ के टीजर के बाद तो इसे कतई नहीं देखिएगा, वरना आप को और तकलीफ होगी। इत्मिनान से बात कहना क्या होता है यह ‘साहो’ का टीजर बताता है। हड़बड़ी में अपनी बात बोल जाना … ‘बाटला हाउस’ के ट्रेलर में है।

जॉन अब्राहम का ‘बाटला हाउस’ के ट्रेलर में ओवरडोज है। कहानी वाकई ऐसी है निखिल के पास जिसे सुनने के लिए जनता भी बेसब्र हो सकती है, लेकिन जॉन को दिखाने का मोड उन्हें छोड़ना था। अपनी बात कहने के लिए एक माहौल तैयार करना था। जब आप एनकाउंटर से शुरू करते हैं तो देखने वाले यूं ही असहज हो जाते हैं। ऐसे में वीडियो एडिटर को ना जाने किस बात की जल्दी थी। इसे एडिट करने वाला कभी बिरयानी नहीं बना सकता, क्योंकि वो सब्र दिखता ही नहीं है। हां, चायनीज का स्टाल जरूर चला सकता है… बोतले खोलकर उन्हें कड़ाही में उल्टा ही तो करना है।

सच कहें तो ‘बाटला हाउस’ के ट्रेलर को लेकर इससे ज्यादा उम्मीद थी। इससे पहले जारी किए गए टीजर जरूर बढ़िया बने थे, लेकिन यह नहीं है। नोरा फतेही समेत तमाम दूसरे कलाकारों को ज्यादा जगह मिल सकती थी और एक सीन को ज्यादा दिखाया जा सकता था। जॉन को गोली लगने वाले सीन पर सब खत्म किया जा सकता था। अभी तो यह अधपका-सा है।

शनिवार को ही इसका ट्रेलर काउंटडाउन 1 जारी हुआ था और फिर काउंटडाउन 2 वीडियो भी आया।

रितेश शाह ने इस फिल्म को लिखा है। जॉन ने संजीव कुमार यादव का रोल किया है। बाटला हाउस एनकाउंटर की जानकारी भी दे ही देते हैं… यह 2008 की 19 सितम्बर को हुआ था। दिल्ली के जामिया नगर इलाके में इंडियन मुजाहिदीन के दो संदिग्ध आतंकवादी आतिफ अमीन और मोहम्मद साजिद को मार गिराया गया लेकिन सैफ मोहम्मद और आरिज़ खान भागने में कामयाब हो गए। इस एनकाउंटर का नेतृत्व कर रहे एनकाउंटर स्पेशलिस्ट और दिल्ली पुलिस निरीक्षक मोहन चंद शर्मा इस घटना में मारे गए। इसी दिन की असली कहानी सामने लाने का दावा यह फिल्म कर रही है। ट्रेलर से कहानी उलझी है, देखना है फिल्म इसे सुलझा पाती है या नहीं।

15 अगस्त को यह फिल्म रिलीज हो रही है। निखिल आडवाणी इसके निर्देशक हैं।

Courtesy: NaiDunia