1862 में पहली बार चली थी ये ट्रेन, डिब्बों को घोड़े हाथी से खींचकर लाए थे स्टेशन

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जनरल कोच में सफर करने की टिकट थी 4 आने और फर्स्ट क्लास की 2 रुपए
 फिरोजपुर(जालंधर). पंजाब की पहली ट्रेन लाहौर से अमृतसर आज के दिन 1862 को चली थी। जिसके लिए अंग्रेजों ने इंग्लैंड से समुंद्री जहाज के जरिए इंजन व डिब्बे मंगवाए थे व इनको स्टेशन तक ले जाने के लिए बैलों और हाथियों का सहारा लिया गया तब जाकर यह ट्रेन चली। रेलवे लगातार वक्त के साथ-साथ तकनीकी मामलों में आगे बढ़ता जा रहा है। यही बजह है कि सबसे पुराने इस वाहन की महत्वता आज भी उतनी ही महसूस की जा रही है।

ऐसे हुई थी शुरूआत

156 वर्ष पूर्व चली यह ट्रेन लाहौर से अमृतसर तक का 50 किलोमीटर का सफर 2 घंटे में तय करती थी। ट्रेन चलने के कुछ दिन बाद ही बैसाखी पर्व था तो लाहौर से प्रतिदिन 1500 यात्रियों ने इस ट्रेन में सफर किया। जुलाई 1856 में इस ट्रैक को तैयार करने के लिए मिट्टी व पत्थर डालने का कार्य शुरू किया तो 8 फरवरी 1859 को इस ट्रैक की नींव अंग्रेज अधिकारी लेफ्टिनेंट गर्वनर ऑफ पंजाब जॉन लारेंस ने रखी। 240 मील लंबी व 5 फीट 6 इंच ब्रॉडगेज मुल्तान-लाहौर-अमृतसर लाईन को इंजीनियर विलियन बूंटन ने तैयार किया। जिसका कार्य 1861 में कंप्लीट कर लिया गया था, लेकिन रेलवे ने इसे औपचारिक तरीके से 1 मार्च 1862 को घोषणा की जिसके बाद यह ट्रेन चली।

इंग्लैंड से लाया गाया था भारत

 इस ट्रेन को चलाने के लिए इंग्लैंड से समुंद्र के रास्ते कराची इंजन व डिब्बे लाए गए जिन्हें कराची से लाहौर तक रावी दरिया से स्टीमर पर लौड कर लाया गया जिसके बाद इन्हें 102 बैल व 2 हाथियों द्वारा खींचकर लाहौर रेलवे स्टेशन तक ले जाया गया। उस समय ईस्ट पंजाब रेलवे द्वारा इस गाड़ी को चलाया गया। कराची से 1 पैसेंजर इंजन, 1 गुड्स इंजन, 2 सेकेंड क्लास कोच, 6 थर्ड क्लास कोच, 13 गुड्स वेगन व 1 ब्रेक वाहन समुंद्री जहाज के जरिए लाहौर लाए गए। इस ट्रेन का उद्घाटन के समय कपूरथला के महाराजा जगजीत सिंह ने मुख्यातिथि के तौर पर शिरकत की।
Courtesy: Bhaskar