Monday, August 10, 2026
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पद्म श्री Dr. Ratan Singh Jaggi का हुआ निधन, साहित्य की एक अमूल्य धरोहर का अंत

पंजाबी और हिंदी साहित्य जगत के दिग्गज डॉ. रतन सिंह जग्गी का आज निधन हो गया।

 पंजाबी और हिंदी साहित्य जगत के दिग्गज डॉ. रतन सिंह जग्गी का आज निधन हो गया। वह 98 वर्ष के थे और कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। डॉ. जग्गी ने साहित्य की दुनिया में जो अमूल्य योगदान दिया है, वह हमेशा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा। वह अपनी पत्नी डॉ. गुरशरण कौर जग्गी (रिटायर्ड प्रिंसिपल, गर्वमेंट कॉलेज फॉर वुमन, पटियाला) और बेटे मलविंदर सिंह जग्गी (रिटायर्ड आई.ए.एस.) के साथ जीवित रहते हुए साहित्य की सेवा करते रहे।
-साहित्य में डॉ. जग्गी का योगदान
डॉ. रतन सिंह जग्गी एक अत्यंत उत्पादक लेखक थे, जिन्होंने 150 से अधिक पुस्तकें लिखीं। वह पंजाबी और हिंदी साहित्य के प्रतिष्ठित विद्वानों में गिने जाते थे और गुरमत और भक्ति आंदोलन पर उनके गहरे शोध ने उन्हें एक विशेषज्ञ बना दिया था। उनके साहित्यिक योगदान के कारण उन्हें भारत सरकार द्वारा पद्म श्री और साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। इसके अलावा, पंजाब सरकार द्वारा उन्हें पंजाबी साहित्य शिरोमणी पुरस्कार से भी नवाजा गया। उनके सम्मान की लंबी सूची में दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश सरकारों द्वारा प्रदान किए गए पुरस्कार और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (SGPC) द्वारा दिए गए सम्मान शामिल हैं।
-डॉ. जग्गी का शैक्षिक और साहित्यिक जीवन
डॉ. रतन सिंह जग्गी ने अपने जीवन के छह दशकों से अधिक समय तक मध्यकालीन साहित्य के अध्ययन, लेखन और आलोचना में समर्पित किया। उन्होंने 1962 में पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ से दसम ग्रंथ दा पुराणिक अध्ययन (दसम ग्रंथ में पुराणिक रचनाओं का आलोचनात्मक अध्ययन) विषय पर पीएचडी की थी। इसके बाद 1973 में मगध विश्वविद्यालय, बोधगया से श्री गुरु नानक: व्यक्तित्व, कृतित्व और चिंतन (गुरु नानक: उनका व्यक्तित्व, कार्य और शिक्षाएं) पर डी.लिट. की डिग्री प्राप्त की।
1987 में पंजाबी विश्वविद्यालय, पटियाला से पंजाबी साहित्य विभाग के प्रोफेसर और प्रमुख के रूप में सेवानिवृत्त होने से पहले डॉ. जग्गी ने कई महत्वपूर्ण साहित्यिक और शैक्षिक कार्य किए। वह अंग्रेजी, हिंदी, पंजाबी, उर्दू, फारसी और संस्कृत भाषाओं में निपुण थे और उन्होंने इन भाषाओं में अद्भुत, विशाल और अत्यधिक सराहे गए साहित्यिक काम किए।
डॉ. जग्गी ने सिख धर्म और श्री गुरु ग्रंथ साहिब पर कई महत्वपूर्ण कार्य किए। उन्होंने भव प्रबोधन टीका-श्री गुरु ग्रंथ साहिब नामक 8 खंडों में एक व्यापक टिप्पणी लिखी, जो पंजाबी और हिंदी में प्रकाशित हुई। इसके अलावा, उन्होंने सिख पंथ विश्वकोश (सिख धर्म का विश्वकोश) और अर्थबोध श्री गुरु ग्रंथ साहिब (श्री गुरु ग्रंथ साहिब की पांच खंडों में उप-टिप्पणी) जैसे महत्वपूर्ण ग्रंथों की रचना की।
550वें प्रकाश पर्व के अवसर पर पंजाब सरकार द्वारा प्रकाशित गुरु नानक बाणी: पाठ और व्याख्या भी डॉ. जग्गी की महत्वपूर्ण कृतियों में शामिल है। उन्होंने गुरु नानक की बाणी पर भी कई पुस्तकें लिखी, जैसे गुरु नानक: जीवनी और व्यक्तित्व और गुरु नानक की विचारधारा, जिन्हें पंजाब सरकार द्वारा पुरस्कार प्राप्त हुए।
-राष्ट्रीय और राज्य पुरस्कार
डॉ. रतन सिंह जग्गी के योगदान को व्यापक पहचान मिली। 2023 में उन्हें पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। इससे पहले 1989 में उन्हें साहित्य अकादमी, दिल्ली से राष्ट्रीय पुरस्कार और 1996 में पंजाब सरकार से पंजाबी साहित्य शिरोमणी पुरस्कार प्राप्त हुआ था। उनकी पुस्तकों को आठ बार पंजाब भाषा विभाग से पहला पुरस्कार प्राप्त हुआ, और हरियाणा सरकार ने 1968 में उनकी पुस्तक के लिए उन्हें सम्मानित किया। इसके अलावा, उन्हें 2010 में पंजाबी अकादमी द्वारा परम साहित्य सत्कार सम्मान और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 1996 में सौहार्द सम्मान से सम्मानित किया गया। पंजाबी विश्वविद्यालय, पटियाला ने उन्हें 2012 में जीवनपर्यंत फेलोशिप और पंजाबी साहित्य अकादमी, लुधियाना ने भी उन्हें फेलोशिप प्रदान की।
-डॉ. जग्गी की अमूल्य धरोहर
डॉ. रतन सिंह जग्गी का निधन साहित्य और शैक्षिक दुनिया में एक अपूरणीय शून्य छोड़ गया है। उनके योगदान से साहित्य और इतिहास के अध्ययन के लिए अनगिनत रास्ते खोले गए। उनका साहित्यिक कार्य हमेशा आने वाली पीढ़ियों के लिए एक अमूल्य धरोहर रहेगा, और उनके विचार और शोध को हमेशा सराहा जाएगा।
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