Thursday, August 13, 2026
spot_img
HomeLatest NewsAIIMS के पैलिएटिव केयर विभाग में रखे गए हरीश राणा, इच्छामृत्यु की...

AIIMS के पैलिएटिव केयर विभाग में रखे गए हरीश राणा, इच्छामृत्यु की ऐसी है प्रक्रिया

हरीश राणा को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर परोक्ष इच्छामृत्यु के लिए एम्स दिल्ली के पैलिएटिव केयर विभाग में रखा गया है.

32 वर्षीय हरीश राणा को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर परोक्ष इच्छामृत्यु (पैसिव यूथेनेशिया) के लिए एम्स दिल्ली के पैलिएटिव केयर विभाग में रखा गया है. डॉक्टर उनकी स्थिति को लेकर फिलहाल कोई निश्चित समय नहीं बता पा रहे हैं. एम्स के पूर्व निदेशक डॉ. एम.सी. मिश्रा का कहना है कि हरीश की मौत में कितना समय लगेगा, यह बता पाना संभव नहीं है.
डॉ. एम.सी. मिश्रा ने बताया कि पैसिव यूथेनेसिया की स्थिति में मरीज की मौत में कुछ समय लग सकता है और यह कहना मुश्किल है कि इसमें कितने दिन लगेंगे. उन्होंने कहा कि फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि हरीश राणा की हालत में बदलाव आने में कितना वक्त लगेगा. उन्होंने बताया कि अगर भोजन की व्यवस्था को कम किया जाता है तो मृत्यु की प्रक्रिया तेज हो सकती है. हालांकि वर्तमान स्थिति में किसी भी तरह के नए इलाज की योजना नहीं है, क्योंकि यह मामला पैलिएटिव केयर के तहत रखा गया है.
हरीश को नहीं हो रहा दर्द महसूस
डॉ. मिश्रा ने कहा कि पैलिएटिव केस में मरीज को केवल दर्द से राहत देने के लिए पेन मैनेजमेंट किया जाता है. हालांकि हरीश राणा के मामले में यह बात सामने आई है कि उन्हें किसी प्रकार का दर्द महसूस नहीं हो रहा है. वहीं एम्स प्रशासन का कहना है कि, मरीज की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और आवश्यक देखभाल जारी है. बता दें कि यह पूरी कार्रवाई सीएमओ की देखरेख में की गई यह भारत में पहला ऐसा मामला है जहां सुप्रीम कोर्ट ने किसी व्यक्ति को इच्छामृत्यु की अनुमति दी है.

हरीश वर्ष 2013 में चंडीगढ़ में एक हादसे में चौथी मंजिल से गिरने के बाद स्थायी वेजिटेटिव स्टेट में हैं. पिछले 13 वर्षों से वे अचेत अवस्था में बिस्तर पर पड़े हुए हैं और लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर हैं. उनके माता-पिता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर लाइफ सपोर्ट हटाने की मांग की थी, जिसे कोर्ट ने मंजूर कर लिया है.

क्या है पैलिएटिव केयर?

एम्स डॉक्टरों के अनुसार, पैलिएटिव केयर में ऐसी चिकित्सा देखभाल होती है, जिसका उद्देश्य गंभीर या असाध्य बीमारी से पीड़ित मरीज को आराम देना और उसकी जीवन गुणवत्ता बेहतर बनाना होता है. इसमें बीमारी को पूरी तरह ठीक करने के बजाय मरीज के दर्द, सांस लेने में तकलीफ, घबराहट, बेचैनी या अन्य शारीरिक-मानसिक परेशानियों को कम करने पर ध्यान दिया जाता है.
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -spot_imgspot_imgspot_imgspot_img
- Advertisment -spot_img
- Advertisment -spot_img

Most Popular

Recent Comments