यहां मरने के बाद पैदा हाेते हैं रिश्ते, शव के रिश्तेदार बनकर करते है दाह संस्कार व आत्मा की मुक्ति के लिए हवन यज्ञ

सैंकड़ाें लावारिसाें शवाें का वारिस बन रहा फिराेजपुर वेल्फेयर क्लब
अब तक कर चुके है करीब 1500 लावारिस शवाें का दाह संस्कार, काेराेना में अनगिनत अात्माअाें काे दिलाई मुक्ति
फिराेजपुर (जतिन्द्र पिंकल) एक ऐसी जगह, जहां पर मरने के बाद किसी भी लावारिस शव के रिश्तेदार पैदा हाेते है जाे मर चुके लावारिस शव का दाह संस्कार उसके धर्म के मुताबिक रीति रिवाजाें से करते है । उस जगह का नाम है शहीदाें का शहर के नाम से मशहूर जिला फिराेजपुर, जहां किसी भी क्षेत्र में जब भी काेई लावारिस शव मिलता है ताे उसके दाह संस्कार के लिए उसके परिवारिक सदस्य बनकर इंसानियत की एक ऐसी मिसाल पेश की जाती है जाे शायद कहीं देखने काे न मिले। मानवता के प्रति सच्ची सेवा की लगन किस हद तक हाे सकती है इसकी मिसाल फिराेजपुर वेल्फेयर क्लब के कार्याें से मिलती है। जिंदगी के अंतिम पड़ाव के बाद लावारिस शब्द काे ही खत्म कर दिया है इस क्लब ने। एक तरफ जहां जीते-जी लाेग अपनाें काे घराें से निकाल देते है वहीं पर फिराेजपुर वेल्फेयर क्लब उक्त लावारिस काे अपना परिवारिक सदस्य मानकर उसका धर्म के मुताबिक दाह संस्कार करती है।

जानकारी के मुताबिक वर्ष 2000 में शहर के बाहर बनी झुग्गी झाेंपड़ी में रहने वाले एक व्यक्ति की मृत्यू हाे गई जाे अकेला था। उस समय के डिप्टी कमिश्नर कुलबीर सिंह सिद्दू के कहे शब्द कि जिले में ऐसी काेई संस्था नही जाे इन लावारिसाें काे अपनाकर इनका दाह संस्कार कर सके। डीसी के कहे शब्दाें ने जैसे सेवा की भावना रखने वाले लाेगाें के दिलाें पर किक का काम किया और फिराेजपुर वेल्फेयक क्लब अस्तित्व में आई। तब से लेकर माैजूदा समय तक इस क्लब की तरफ से मिले आंकड़ाें के मुताबिक 1426 शवाें का दाह संस्कार किया जा चुका है जिसमें वर्ष 2022 में ही 78 लावारिस शवाें का दाह संस्कार किया गया। इस काम के लिए जहां क्लब का प्रत्येक सदस्य ताे अपना सहयाेग देता ही है वहीं पर क्लब काे इंसानियत के इस काम में लाेगाें का सहयाेग भी मिल रहा है और जरूरत पड़ने पर क्लब की तरफ से लाेगाें से मांग कर पैसा इकट्ठा किया जाता है।
क्लब के चैयरमेन अरूण शर्मा, अध्यक्ष कुलदीप मैनी व अंकू ने बताया कि करीब 22 वर्ष पहले काैंसिल की कचरा गाड़ी में लावारिस शव काे लाया जाता था लेकिन कुछ साल पहले ही रेडक्रास के सहयाेग से एक एम्बूलेंस खरीदी गई है जिससे किसी भी लावारिस शव काे मान-सम्मान से दाह संस्कार के लिए शमशान घाट या उसके धर्म के मुताबिक जगह पर ले जाकर उसका अंतिम संस्कार किया जाता है। उन्हाेंने बताया कि ऊपर वाले ने जाे सेवा लगाई है उसे काेराेना जैसे खतरनाक समय में भी निभाया जाता रहा। काेराेना से पीड़ित मरने वाले लाेगाें काे खुद उनके परिवारिक सदस्याें ने लावारिसाें की तरह छाेड़ दिया था तब भी क्लब की तरफ से प्रशासन से पीपीई किटें लेकर अनगिनत शवाें का दाह संस्कार किया जाता रहा।

