टाटा कोसमो से गाड़ी लेने वाले हो जाए सावधान, झेलनी पड़ सकती है परेशानी

जालंधर (वीओपी ब्यूरो) जब भी आप नई गाड़ी लेने का प्लान बनाते हैं और आप किसी कार डीलर के पास जाते हैं | तो गाड़ी लेने से पहले आपको उसी डीलर की तरफ से सैकड़ों कॉल आती है लेकिन गाड़ी लेते ही अगर आपको कोई दिक्कत आ जाती है | वही डीलर आपसे ऐसे व्यवहार करते हैं जैसे आप ने उनसे गाड़ी ली ही न हो |

ऐसा ही एक कारनामा जालंधर की टाटा कॉस्मो में देखने को मिला | जहां पर परमजीत सिंह नाम के एक व्यक्ति ने अगस्त 1997 में टाटा टियागो गाड़ी खरीदी और गाड़ी खरीदने के बाद जो पहचान पत्र उन्होंने कंपनी को दिए | उसके उलट कंपनी में उनका नाम परमिंदर सिंह चलता रहा और उनको जब भी काल आती रही उन्होने अपने नाम को सही करने की गुजारिश की | लेकिन कंपनी के अधिकारियों एक साल बाद उनका नाम ठीक कर दिया |

शिकायतकर्ता परमजीत सिंह ने 2 साल बीतने के बाद जब अपनी गाड़ी की इन्शुरेंस कंपनी से करवाई तो फिर से कंपनी ने परमजीत सिंह की जगह परमिंदर सिंह के नाम से इंश्योरेंस कर दी | परमजीत सिंह ने भी ध्यान नहीं दिया और उन्होंने लगभग 6 महीने बाद गाड़ी बेच दी | गाड़ी बेचने के बाद गाड़ी खरीदने वाले व्यक्ति ने गाड़ी का लोन एक बैंक से करवाया तो पेमेंट करते समय बैंक ने कहा कि इंश्योरेंस परमजीत सिंह के नाम पर नहीं बल्कि परमिंदर सिंह के नाम पर है | जिसके बाद परमजीत सिंह ने 9 मार्च को टाटा कॉस्मो के जी एम उमेश अरोड़ा से बात की तो उन्होने एक दो दिन मे इसको ठीक करवाने को कहा | जब परमजीत सिंह ने दो दिन बाद उमेश अरोड़ा से बात की तो उन्होंने शिवरात्रि के पावन तेयोहार के चलते इन्शुरेंस कंपनी बंद होने की बात करते हुये टालमटोल की |

इसके बाद शिकायतकर्ता ने मीडिया के सामने गुहार लगाई और जब इस के बारे मे टाटा कोसमो के डायरेक्टर राघव आहूजा से बात की तो उन्होंने व्यस्त होने के चलते जल्द ही उसका हल निकाल की बात कही और कुछ देर बाद ही टाटा कॉस्मो के जीएम उमेश अरोड़ा ने शिकायतकर्ता परमजीत सिंह को फोन करके इन्शुरेंस मे नाम ठीक होने की बात कही |

जिस के बाद शिकायतकर्ता ने मीडिया का धन्यवाद किया लेकिन सब से बड़ा सवाल है की शिकायतकर्ता के मीडिया में जाने के बाद उनका हल किया गया | इस से पहले साडे तीन साल तक उनको परेशान किया जाता रहा |

 

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